'आगे-पीछे का कुछ सोचे बिना ठान लिया था कि, जब मरना ही है तो इज्जत से मरेंगे. निरीह-निहत्थे लोगों को बेबसी-लाचारी के आलम में खाड़कूओं (आतंकवादियों) के हाथों यूं ही फोकट में मरने देने के लिए नहीं छोडूंगा'from Latest News अभी अभी Firstpost Hindi https://ift.tt/2LfuP0D

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